संस्कृत भाषा में वर्णों के उच्चारण स्थान को अत्यधिक सहज तरीके से प्रस्तुत किया गया है। हमारे आचार्यों ने परिभाषाओं को सूत्रों में पिरोकर सहज एवं आसान बना दिया है। वर्णों के उच्चारण-स्थान सामान्यतः कण्ठ, तालु, मूर्धा, दन्त, ओष्ठ, नासिका आदि हैं। उच्चारण-स्थान के आधार पर वर्णों को निम्नलिखित सूत्रों में पिरोया गया है – अकुहविसर्जनीयानां कण्ठः। अर्थात् अ, आ, कवर्ग (क ख ग घ ङ), ह और विसर्ग (:) का उच्चारण स्थान कण्ठ है। इचुयशानां तालु। अर्थात् इ, ई, चवर्ग (च छ ज झ ञ), य और श का उच्चारण स्थान तालु है। उपूपध्मानीयानामोष्ठौ। अर्थात् उ, ऊ, पवर्ग (प फ ब भ म) का उच्चारण स्थान ओष्ठ है। ऋटुरषाणां मूर्धा। अर्थात् ऋ, टवर्ग (ट ठ ड ढ ण), र और ष का उच्चारण स्थान मूर्धा है। लृतुलसानां दन्ताः। अर्थात् लृ, तवर्ग (त थ द ध न), ल और स का उच्चारण स्थान दन्त है। एदैतौः कण्ठतालु। अर्थात्...